हल्के से याद हैं, वो लम्हे बीती बातों के,
कुछ धूप मैली सी, गुलज़ार थोड़े हैं।
मुद्दत से सींचा है, यादों के दरख़्त को,
आज फिर उस दरख़्त से, चंद यार तोड़े हैं।
जिस फुर्सत से रखता हूं, ज़िंदगी का हिसाब,
कुछ नए पन्ने आज, तेरे नाम छोड़े हैं।
है किस्सों और जुमलों का नाम ज़िंदगी,
दो चार तेरे और मेरे नाम जोड़े हैं।